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मोमेंटम झारखण्ड बनाम एजीटेटेड झारखण्ड

“झारखण्ड उड़ान भरेगा जब आपका साथ मिलेगा” प्रसिद्ध क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी के इस सूत्रवाक्य के साथ बड़े-बड़े होर्डिंग, डिजिटल डिस्प्ले, एअरपोर्ट से खेलगांव तक ले जाने के लिए हेलीकाप्टर सेवा, सीसी टीवी की निगरानी व नए यूनिफार्म और हथियारों से लैस सुरक्षा के लिए तैनात पुलिस-कर्मियों का लगातार मोकड्रील का तामझाम और अख़बारों में विज्ञापन के साथ मुख्यमंत्री रघुवर दास की तस्वीर –मोमेंटम झारखण्ड का आगाज़ कर रही है- मोमेंटम झारखण्ड का मतलब संवेग झारखण्ड, यानि गतिशील झारखण्ड जो ग्लोबल इन्वेस्टर समिट -२०१७ (वैश्विक निवेशक शिखर सम्मलेन) के लिए इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन (निवेशकों का गंतव्य स्थल) के लिए तैयार है और राजधानी रांची को दुल्हन की तरह सजाने की भरी-भरकम कवायद चल रही है| प्रशिक्षु आई.एस अधिकारीयों व प्रशासनिक ऑफिसरों को लायसन अधिकारी के रूप में अतिथियों के साथ प्रतिनियुक्ति की गयी है| अतिथियों को 1600/- रूपये प्रति प्लेट वाला खाना परोसा जाएगा| इस इवेंट को संचालित करने वाली कंपनी ने अतिथियों को चांदी के चम्मच से खिलाने का भी प्रस्ताव दिया है| इसके अलावा निवेशकों को दिखलाने के लिए बने गयी प्रमोशनल फिल्म में उद्योग जगत की दिग्गज हस्तियां झारखण्ड में संभावनाओं का गुणगान करते हुए इसे निवेशकों का बेहतर ठिकाना बताएँगे और कहेंगे- आवा हमर झारखण्ड|
इस आयोजन के वेबसाइट पर ब्रांड एम्बेसडर धोनी के 1 मिनट के विडियो क्लिपिंग की शुरुयात “ हम हर सिचुएशन में कूल क्यों होते हैं” से होती है जिसमे धोनी इसका श्रेय झारखण्ड की मिटटी की एक विशेष सुगंध को देते हैं| क्रिकेटर धोनी की बात सौ प्रतिशत सच है| झारखण्ड के लोग अत्यधिक कूल हैं तभी तो लाखों के संख्या में विस्थापन का दंश झेलने के बाद भी झारखण्ड की ‘कूल जनता’ पिछले १६ वर्षों से यह सपना पाले हुए हैं कि उनकी ज़मीन, जल और जंगल पर, जो उनकी जीविका के मूल श्रोत हैं उसपर उनका अधिकार और सशक्त होगा| लेकिन इतिहास अपने को दोहराता है क्योंकि यही कूल जनता जब ‘हॉट’ होती है तब “हूल और उलगुलान” होता है| मोमेंटम झारखण्ड का शुभंकर यानि प्रतीक चिन्ह एक्नान्हा हठी है जो मोमेंटम झारखण्ड के लिए उड़ने को तैयार है यानि एक असंभव परिकल्पना| हालाँकि आयोजक झारखण्ड सर्कार यह दावा कर रही है की असंभव को संभव करने के लिए ही तो वह सारी ‘विघ्न-बाधायों’ को हटा रही है| यानी झारखण्ड के वीर पुरखों के बलिदानों से बने छोटानागपुर व संताल परगना काश्तकारी कानूनों को निष्प्रभावी कर यहाँ की कृषि योग्य ज़मीन की प्रकृति को ही बदल रही है| जिससे यहाँ के रैयत काफी गुस्से में हैं क्योंकि यहउनके अस्तित्व पर ही हमला है| देश में झारखण्ड के हरे-भरे वैन यहाँ की हरियाली छटा के प्रतीक हैं लेकिन अवैध कटाई से ये सिकुड़ते जा रहे हैं और मोमेंटम झारखण्ड का प्रतीक हठी की इससे सबसे ज्यादा पीड़ित है| वह मजबूरी में सिकुड़ते हुए जंगलों से निकलकर ग्रामीण बस्तियों का रूख करते हैं और वहां रहने वाली जनता के लिए आतंक व भय का पर्याय बन गए हैं क्योंकि इन आश्रय विहीन हाथियों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में अबतक सैकड़ों लोग मरे जा चुके हैं|
मोमेंटम झारखण्ड के वैश्विक निवेशक सम्मलेन में १५ सेक्टरों के ८८ परियोजनायों पर समझौते का ऐलान किया गया है| इसकी तयारी पिछले एक वर्ष से चल रही है| इसी क्रम में देश-विदेश में मुख्यमंत्री और अधिकारीयों के रोड शो आयोजित हो चुके हैं| सर्कार ने कथित विकास के मद्देनज़र १५ से ज्यादा नीतियाँ लागू की हैं| निवेशकों के लिए ज़मीन की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है जिसके लिए राज्य सरकार द्वारा लैंड बैंक में उपलब्ध 1 लाख एकर ज़मीन जियादा (झारखण्ड औद्योगिक क्षेत्र विकाश प्राधिकार) को हस्तांतरित किया जा रहा है| इसके पहले भी झारखण्ड में विभिन्न दलों की सरकारों ने कॉर्पोरेट घरानों के लिए रेड कारपेट बिछाकर सैकड़ों MOU किया था लेकिन धरातल पर कुछ नहीं दिखा| एक अवैज्ञानिक विज़न और केवल कॉर्पोरेट हितों को सर्वोपरी रखने से केवल चाँद लोगों का विकास होता है और आम जनता विनाश के भंवर में फंस जाती है| इसलिए गतिशील झारखण्ड की परिकल्पना के केंद्र में यहाँ के किसानों, रैयतों, आदिवासियों, दलितों और विशाल श्रम शक्ति से भरपूर मानव संसाधन यानि मेहनतकशों को रखना होगा| मोमेंटम झारखण्ड वाइब्रेंट गुजरात के तर्ज़ पर नहीं बन सकता क्योंकि इस राज्य की अपनी ख़ास विशिष्टता है| इसलिए ही स्वतंत्र भारत में देश का संविधान लागू होने के समय से ही इसे संविधान के ५वि अनुसूची के अंतर्गत विशेष सुरक्षा दी गयी है| राज्य में कृषि और उद्योग दोनों के विकास की काफी संभावनाएं हैं, ज़रुरत है एक वैकल्पिक जनपक्षीय नीतिगत फैसले की जिसमे जनता की भागीदारी सर्वोपरी है| इसलिय झारखण्ड के उड़ान भरने के स्वप्न को ज़मीन पर उतारना है तो जनता की मर्ज़ी को दरकिनार कर इसे पूरा नहीं किया जा सकता| यही बात समझने की ज़रुरत है|

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